Best 5  Moral Stories in Hindi

नमस्कार दोस्तो, हमेशा की तरह आज फिर से एक नए पोस्ट Best Moral Stories in Hindi के साथ हाजिर है। हम उम्मीद करते है की ये पोस्ट आपको पसंद आयेगी और आप इसे अपने दोस्तो के साथ जरूर शेयर करेंगे।

सब्र का इम्तिहान 

Best Moral Stories in Hindi

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संत एकनाथ को अपने उत्तराधिकारी की तलाश थी। वह किसी योग्य शिष्य को यह दायित्व सौपना चाहते थे। उन्होंने शिष्यों की परीक्षा लेना चाहा । एक दिन उन्होंने अपने सभी शिष्यों को बुलाया और एक दीवार बनाने का निर्देश दिया और शिष्य इस काम में जुट गए। दीवार बनकर तैयार भी हो गई लेकिन तभी एकनाथ ने उसे तोड़ने का आदेश दे दिया। 

दीवार टूटते ही फिर से उसे बनाने को कहा।दीवार फिर बनी तो एकनाथ ने फिर तुड़वा दी। दीवार ज्यों ही तैयार होती एकनाथ उसे तोड़ने को कह देते। यह सिलसिला चलता रहा। धीरे-धीरे उनके अनेक शिष्य उगता गए और इस काम से किनारा करने लगे। लेकिन चित्र भानु पूरी लगन के साथ अपने काम में जुटा रहा।

बार-बार तोड़े जाने के बावजूद दीवार बनाने के काम से वह परेशान नहीं हुआ और ना ही जरा भी झुंझलाया। एक दिन एकनाथ उसके पास गए और बोले तुम्हारे सभी मित्र काम छोड़कर भाग गए हैं पर तुम अब तक डटे क्यों हो? चित्रभानु बोला – गुरु की आज्ञा से मैं पीछे कैसे है सकता हूं ? तब तक यह कार्य करता रहूंगा जब तक आप मना न कर दें।

एकनाथ बड़े प्रसन्न हुए उन्होंने चित्रभानु को अपना उत्तराधिकारी घोषित करते हुए सभी शिष्यों से कहा सर्वोच्च पद पर पहुंचने के लिए पात्रता भी जरूरी है।जो पात्रता पाने का प्रयास नहीं करते या पीछे हट जाते हैं वह पीछे ही रह जाते हैं। धैर्य ही सबसे बड़ी परीक्षा है।

 अहंकार 

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दुनिया में व्यर्थ सिर्फ अहंकार ही होता है इससे मिलने तो कुछ नहीं बल्कि जो है उसे भी नष्ट कर देता है इससे यथासंभव बचना चाहिए।

एक ऋषि सर्वथा सहज अभिमानी बैरागी और अत्यधिक ज्ञानी थे। दूर-दूर से लोग उनके पास ज्ञान अर्जन करने के लिए आते थे। एक दिन एक युवक ने आकर उनके समक्ष शिष्य बनने की इच्छा प्रकट की। ऋषि ने सहमति दे दी। वह ऋषि के पास रहने लगा। वह ऋषि की शिक्षा को पूर्ण मनोयोग से ग्रहण करता था। एक दिन ऋषि ने कहा जाओ बस तुम्हारी शिक्षा पूर्ण  हुई। अब तुम इसका उपयोग कर दूसरों का जीवन बेहतर बनाओ।

युवक ने उन्हें गुरु दक्षिणा देना चाहा। ऋषि बोले यदि तुम गुरु दक्षिणा देना ही चाहते हो तो वह चीज लेकर आओ जो बिल्कुल व्यर्थ हो। युवक व्यर्थ चीज की खोज में चल पड़ा।उसने सोचा मिट्टी ही सबसे व्यर्थ हो सकती है। यह सोचकर उसने मिट्टी लेने के लिए हाथ बढ़ाया तो वह बोल उठी तूमुझे व्यर्थ समझते हो धरती का सारा वैभव मेरे गर्भ में ही होता है। यह विविध रूप,रस, गंध क्या मुझे उत्पन्न नहीं होते? 

युवक आगे बढ़ा तो उसे गंदगी का ढेर दिखाई दिया। उसने गंदगी की ओर हाथ बढ़ाया तो उसमें से आवाज आई क्या मुझसे बेहतर खाद धरती पर मिलेगी? सारी फसले मुझसे ही पोषण पाती हैं फिर मैं व्यर्थ कैसे हो सकती हूं। 

युवक सोचने लगा वस्तुतः सृष्टि का हर पदार्थ अपने में उपयोगी है। व्यर्थ अगर कुछ है तो वह है – जो दूसरों को व्यर्थ समझता है।अहंकार के सिवा और क्या व्यर्थ हो सकता है।

युवक तत्काल ऋषि के पास जाकर बोला कि वह गुरु दक्षिणा में अपना अहंकार देने आया है। यह सुनकर ऋषि बोले ठीक समझे। बस अहंकार के विसर्जन से ही विद्या सार्थक और फलवती होती है। 

इसका संकेत स्पष्ट है दुनिया में व्यर्थ सिर्फ अहंकार होता है। जो कुछ देने के स्थान पर जो है उसे भी नष्ट कर देता है। हमें इससे यथासंभव बचना चाहिए। 

गुण की कदर 

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सम्राट चंद्रगुप्त ने एक दिन अपने प्रतिभाशाली मंत्री चाणक्य से कहा – कितना अच्छा होता कि तुम अगर रूपवान भी होते। 

चाणक्य ने उत्तर दिया – महाराज रूप तो मृगतृष्णा है। आदमी की पहचान तो गुण और बुद्धि से ही होती है रूप से नहीं। 

चंद्रगुप्त ने पूछा – क्या कोई ऐसा उदाहरण है जहां गुण के सामने रूप फीका दिखे? 

चाणक्य ने कहा –  महाराज ऐसे तो कई उदाहरण है। पहले आप पानी पीकर मन को हल्का करें। बाद में बात करेंगे। फिर उन्होंने दो पानी के बड़े बड़े गिलास राजा की ओर बढ़ा दिए। महाराज पहले गिलास का पानी इस सोने के घड़े का था और दूसरे गिलास का पानी काली मिट्टी की उस मटकी का था। अब आप बताएं कि कौन सा गिलास का पानी आपको अत्यधिक मीठा और स्वादिष्ट लगा ? 

सम्राट ने जवाब दिया मटकी से भरे गिलास का पानी शीतल और स्वादिष्ट लगा एवं उसे तृप्ति भी मिला। वहां उपस्थित महारानी ने मुस्कुरा कर कहा – महाराज हमारे प्रधानमंत्री ने बुद्धि पूर्ण प्रश्न का उत्तर दिया है। भला यह सोने का खूबसूरत घड़ा किस काम का जिसका पानी ही बेस्वाद लगता है

 दूसरी और काली मिट्टी से बनी यह मटकी जो कुरूप तो लगती है लेकिन इसमें जो जल हैं उसका शीतल और स्वादिष्ट पानी पीकर मन मंत्रमुग्ध हो जाता है। 

अब आप ही बतला दें रूप बड़ा है गुण या बुद्धि? गुण की ही कदर की जाती है। जिस व्यक्ति के अंदर गुण होते हैं उन्हें हमेशा याद रखा जाता है।  

बीरबल की चतुराई 

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बीरबल अकबर बादशाह के दरबार के नवरत्नों में से एक थे। वह बड़े गुनी प्रतिभावान और विद्वान व्यक्ति थे। उनकी बुद्धिमानी सूझबूझ और चतुराई के कारण अकबर उनका सम्मान करते थे। अकबर का बीरबल के प्रति विशेष अनुराग देखकर दरबार के कई लोगों उनसे जलते थे। उनमें से एक बादशाह का नाऊ था जो मन ही मन  बीरबल की जान का दुश्मन था और हर समय मौके की तलाश में रहता था। अक्सर वह बादशाह अकबर के कान भी भरता रहता था। 

एक दिन उसने बीरबल से छुटकारा पाने की एक योजना बनाई। योजना के अनुसार अकबर की दाढ़ी बनाते समय वह बादशाह से बोला जहपनाह आपके पुरखों को जन्नत गए बहुत सम हो गया है। आपने उनकी कोई खैर खबर नहीं ली। 

अकबर  – बेवकूफ जन्नत से भी कोई खबर आती है। नाऊ – क्यों नहीं जहापनाहआप किसी समझदार और होशियार आदमी को जन्नत भेजिए। वह आपके पुरखों की खैरियत का पता लगा लगा सके 

अकबर – ऐसा होशियार और समझदार आदमी कौन हो सकता है?

नाऊ – जहापनाह बीरबल से अधिक होशियार और समझदार भला कौन हो सकता है? आप उन्हें ही जन्नत भेज दीजिए। 

अकबर – यह तो ठीक है पर वह जन्नत जाएगा कैसे?

नाऊ – इसमें क्या मुश्किल है? शमशान भूमि में एक जगह पर लकड़ियों का ढेर लगाकर उस पर बीरबल को बिठा दिया जाए और लकड़ियों में आग लगा दी जाए। 

उससे जो धुआं उठेगा उसी से वह जन्नत पहुंच जाएंगे।

अकबर को बात जच गई उन्होंने बीरबल को बुलाकर जन्नत जाने के लिए तैयार होने को कहा।

अकबर की बात सुनकर बीरबल हैरान रह गए और नाऊ को मुस्कुराते देखा तो वह सब समझ गए। 

कुछ देर सोच कर वे बोले – मैं तैयार हूं। जहापनाह लेकिन इसके लिए मुझे 1 महीने की मोहलत और 10000 अशरफिया चाहिए। मैं अपनी बीवी और बच्चों का इंतजाम करना चाहता हूं। हो सकता है मैं जन्नत से वापस ही ना पाऊं। 

अकबर ने बीरबल को 10000 अशर्फियां दिलवा दी। बीरबल ने घर जाकर पूरी बात अपनी पत्नी को बताईं। उन्होंने मिलकर एक योजना बनाई घर से शमशान भूमि तक एक सुरंग बनवा ली और उसे इस तरह बंद कर दिया कि पता ही ना चल सके। 

ठीक 1 महीने बाद बीरबल को शमशान भूमि लाया गया। बीरबल उसे जगह पर बैठ गए जहां पर नीचे सुरंग का मुंह था। बीरबल के ऊपर लकड़ियों का ढेर लगा दिया गया। फिर उसमें आग लगा दी गई बीरबल के चाहने वाले रो पड़े। 

नाऊ और उसके जैसे बीरबल के दुश्मनों के चेहरे पर खुशी बरस रही थी परंतु उन्हें क्या मालूम बीरबल तो सुरंग के रास्ते अपने घर पहुंच गए। कुछ दिन बीत जाने के बाद अकबर को बीरबल की याद आने लगी। कभी-कभी उन्हें पछतावा भी होता। वह उदास रहने लगे। उधर बीरबल अपने घर में चैन से रह रहे थे। बीरबल ने अपनी दाढ़ी मूंछ और नाखून बढ़ाने शुरू कर दिए।

 3 महीने बीत गए एक दिन बीरबल शाही पोशाक पहनकर दरबार में हाजिर हो गए। बीरबल को देखते ही बादशाह ने उसे खुशी से गले लगा लिया और पूछा कहो बीरबल जन्नत में हमारे बाप दादा ठीक तो हैं? बीरबल बोले जहांपनाह सब बहुत खुश है। वहां मेरा भी मन लग गया था।मैं तो इस दुनिया को भूल ही चुका था परंतु क्या करता ?

अकबर – क्यों ऐसी क्या बात हुई?

बीरबल – हुजूर आपके दादा साहब ने भेजा है मुझे। वहां दरअसल कोई नाई नहीं है। इससे उन्हें बड़ी दिक्कत हो रही है। उनकी दाढ़ी मूंछें बहुत लंबी-लंबी हो गई है।

अकबर बोले – अच्छा हम फौरन एक नाई को वहां भेज देते हैं। अपने नाई से बेहतर तो कोई हो ही नहीं सकता। हमारा ख्याल है उसी का वहां जाना ठीक रहेगा।

यह बात सुनकर नाई के तो होश ही उड़ गए। दूसरों के लिए खोदी गई खाई में वह खुद ही गिरने जा रहा था। अकबर ने नाई को अगले दिन ही जन्नत भेज दिए जाने का हुक्म दे दिया। बेचारा नाई कुछ ना कह सका। उसे अपने किए की सजा मिल गई।

मां की महिमा 

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स्वामी विवेकानंद जी से एक जिज्ञासु ने प्रश्न किया मां की महिमा संसार में किस कारण से गायी जाती है? स्वामी जी मुस्कुराए और उस व्यक्ति से बोले – पांच शेर वजन का एक पत्थर ले आओ। वो व्यक्ति पत्थर ले आया तो स्वामी जी ने उससे कहा अब इस पत्थर को किसी कपड़े में लपेटकर अपने पेट पर बांध लो और 24 घंटे बाद मेरे पास आओ तो मैं तुम्हारे प्रश्न का उत्तर दूंगा। 

 स्वामी जी के आदेश अनुसार उस व्यक्ति ने पत्थर को अपने पेट पर बांध लिया और चला गया। पत्थर बंधे हुए दिन भर वह काम करता रहा किंतु उस पत्थर से परेशानी और थकान महसूस होती रही। 

शाम होते-होते पत्थर का बहुत संभाले हुए चलना फिरना उसके लिए असहाय हो उठा। थका मादा वो स्वामी जी के पास पहुंचा और बोला मैं इस पत्थर को अब और अधिक देर तक बांधे नहीं रख सकूंगा। एक प्रश्न का उत्तर पाने के लिए मैं इतनी कड़ी सजा भुगत रहा हूं।

स्वामी जी ने मुस्कुराते हुए बोले – पेट पर इस पत्थर का बोझ तुमसे कुछ घंटे नहीं उठाया गया मां ने अपने गर्भ में पलने वाले शिशु को पूरे नौ माह तक उसे उठा रखा और गृहस्थी का सारा काम करती रही। 

संसार में मां के सिवाय कोई इतना धैर्यवान और सहनशील नही हो सकता है इसलिए मां से बढ़कर इस संसार में कोई भी नहीं है। 

अमिट छाप 

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एक बार की बात है दो दोस्त रेगिस्तान से होकर गुजर रहे थे। सफर के दौरान दोनों के बीच में किसी बात को लेकर कहा सुनी हो गई और उनमें से एक दोस्त ने दूसरे के गाल पर थप्पड़ मार दिया। जिसने थप्पड़ खाया था उसे बहुत आघात पहुंचा लेकिन वह चुप रहा और उसने बिना कुछ बोले रेत पर लिख दिया आज मेरे सबसे अच्छे मित्र ने मुझे थप्पड़ मारा। 

उसके बाद उन दोनों ने दोबारा चलना शुरू किया। चलते-चलते उन्हें एक नदी मिली दोनों दोस्त उस नदी में स्नान के लिए उतरे। जिस दोस्त ने थप्पड़ खाया था उसका पैर फिसला और वह पानी में डूबने लगा। उसे तैरना नहीं आता था। दूसरे मित्र ने जब उसकी चीख सुनी तो मैं उसे बचाने की कोशिश करने लगा और उसे निकालकर बाहर ले आया। अब डूबने वाले दोस्त ने पत्थर के ऊपर लिखा आज मेरे सबसे अच्छे मित्र ने मेरी जान बचाई। वह दोस्त जिसे थप्पड़ मारा और जान बचाई उसने दूसरे से पूछा जब मैं तुम्हें थप्पड़ मारा तब तुमने रेत पर लिखा और जब मैं तुम्हारी जान बचाई तब तुमने पत्थर पर लिखा ऐसा क्यों ? 

दूसरे दोस्त ने जवाब दिया रेत पर इसलिए लिखा ताकि वह जल्दी मिट जाए और पत्थर पर इसलिए लिखा ताकि वह कभी ना मिटे।

दोस्तो, आज की ये पोस्ट Best Moral Stories in Hindi आपको कैसी लगी ये आप हमें कॉमेंट करके बता सकते है। ऐसे ही मजेदार कहानियां आपके लिए आगे भी लेकर आते रहेंगे।

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